Anubhav Ke Darakht

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Description

‘मीनू’ मीना सिन्हा के तृतीय काव्य संग्रह में जीवन को सकारात्मक नजरियों के साथ देखती हुई जमीन से जुड़ी १०८ कविताएं हैं । संकलन में ‘अपनी बात’ की काव्यमय प्रस्तुति दिल को छूती हुई उम्मीद की ऐसी किरण जगाती दिख पड़ती है जो अंधेरे को मिटा देने के लिए आकुल-व्याकुल है।
सामाजिक विसंगतियों पर निर्मम प्रहार है तो प्रेम की रची-पगी चाशनी, राजनीतिक की निर्ममता, मतदान की जागरूकता, आतंकवादियों को मुख्य धारा में लाने की कारूणिक पुकार, तार-तार होते रिश्तों की कथा, होली की मस्ती, विरहिणी की व्यथा, प्रकृति की मनमोहकता-भयावहता, सोशल मीडिया पर दिखावा, देशभक्ति के स्वर, सेवानिवृत्ति का अमृत फल, हास्य-व्यंग्य विधा में समाहित कविताएं जो हमें रोजमर्रा की जिंदगी से रूबरू कराती हुई इतर अहसास कराती हैं ।
‘कोरोना कहर’ खंड में बारह कविताएं फिर सुबह आएगी को गुनगुनाती -दुहराती हुई….।
यथार्थ के थपेड़ो से भावनाओं के ज्वार-भाटा में डूबते-उतराते, ‘अनुभव के दरख़्त’ की छाया में बेहतर सुकून हासिल करने के लिए पठनीय एवं संग्रहणीय !

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