Description
धन्य है काल की गति, जिसमें तुम्हारी साधना का प्रदीप प्रज्वलित होने जा रहा है। विष्णु शर्मा द्वारा विरचित पंचतंत्र विश्व साहित्य में भारतीय साहित्य की महनीय उपलब्धि है। इसमें नीति की अत्यंत मनोरम शिक्षाप्रद कहानियां संग्रहीत हैं। यह वह कृति है जिसे किसी जमाने में राजकुमारों को राजनीति, धर्म और व्यावहारिक नीति शास्त्र की दीक्षा प्रदान करने के लिये पशु-पक्षियों की कहानियों के माध्यम से प्रचारित एवं प्रसारित थी। इस मूल कृति के 200 से अधिक संस्करण निकल चुके हैं। यह यूनानी, स्पेनिश, लैटिन, जर्मन, अंग्रेजी भाषाओं में अनूदित होकर पर्याप्त ख्याति प्राप्त कर चुका है। आज भी जावा से लेकर आइसलैंड तक उसका पठन-पाठन सुचारु रूप से हो रहा है। हिंदी भाषा की देवनागरी लिपि में पंचतंत्र का काव्यांतरण प्रथम बार विश्व पटल पर अवतरित हुआ है। प्रायः पंचतंत्र की कथाएं गद्य में ही लिखी गई है उसकी आदेशात्मक सूक्तियां पद्म में है। इसका हिंदी काव्यांतरण प्रथम बार स्वनामधन्य सीताराम बघेल की लेखनी से सरल, सहज एवं सुगम रूप से प्रस्तुत किया गया है इसके गर्भ में 5580 छंद की सुभाषित माला वीणावादिनी सरस्वती को अलंकृत कर जो मनोरम और मधुरिम शोभा श्री की स्वर्णिम आभा बिखेरी है, उसके प्रति में अपनी श्रद्धा प्रकट करता हूं। इस अनुपम कृति के लिए लेखक को साधुवाद देता हूं और आशा करता हूं कि वह भविष्य में अपनी लेखनी का प्रसाद हम सबको देते रहेंगे। इत्यलम् ।









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